दाल मिल में कई मशीनें देखकर एक स्वाभाविक सवाल उठता है: दाने को अलग करने के लिए इतने चरण क्यों? वजह यह है कि आकार, घनत्व और रंग अलग विशेषताएं हैं। चने के बराबर आकार का पत्थर, छोटे आकार का सही दाना और बदरंग दाना एक जैसी समस्या नहीं हैं। हर उपकरण अपने अलग तरीके से पहचान और छंटाई करता है।
यह लेख अनाज और दाल प्रसंस्करण के सामान्य सिद्धांत समझाता है। दिए गए निर्माता स्रोत तकनीक के उदाहरण हैं; वे Neevika में किसी खास ब्रांड, मॉडल, सेंसर या क्षमता के स्थापित होने का दावा नहीं हैं। वास्तविक लाइन का क्रम और उपकरण कच्चे माल तथा बनने वाले उत्पाद के अनुसार बदल सकते हैं।
छलनी आकार के आधार पर अलग करती है
स्क्रीन या छलनी वाले सेपरेटर में छेदों के आकार से सामग्री अलग होती है। जरूरत से बड़े कण एक सतह पर रुक सकते हैं और छोटे कण दूसरी ओर निकल सकते हैं। Bühler के Vitaris सेपरेटर का विवरण मोटी और महीन अशुद्धियां अलग करने के लिए अलग sieve decks बताता है। इससे समझ आता है कि सही छलनी का चयन क्यों महत्वपूर्ण है। [1]
मान लीजिए कोई बाहरी कण चने के लगभग बराबर आकार का है। केवल आकार देखकर उसे पहचानना मुश्किल हो सकता है। इस उदाहरण से अगले उपकरण की जरूरत समझ आती है; यह किसी मशीन की पूरी क्षमता या किसी खेप के परिणाम का परीक्षण नहीं है।
डी स्टोनर भारी कणों की अलग पहचान करता है
डी स्टोनर का काम पत्थर और अन्य अधिक घनत्व वाले कणों को उत्पाद की धारा से अलग करना है। निर्माता के MTSD विवरण में दाने के आकार के छोटे कंकड़ अलग करने की क्षमता भी बताई गई है। उसी विवरण में स्पष्ट है कि काम करने की क्षमता उत्पाद और उसमें मौजूद अशुद्धियों के स्तर से बदलती है। किसी दूसरे उत्पाद या मॉडल पर उसकी संख्या सीधे लागू नहीं की जानी चाहिए। [2]
साइज ग्रेडिंग में दानों को वर्गों में बांटा जाता है
ग्रेडिंग का उद्देश्य जरूरत के अनुसार अलग आकार वाले हिस्से पाना हो सकता है। सिफ्टिंग और ग्रेडिंग उपकरण मोटे से महीन कणों को अलग वर्गों में बांटते हैं। इसलिए सफाई के दौरान बाहरी सामग्री हटाने और उत्पाद के आकार तय करने की चर्चा अलग रखें। दोनों में छलनी का उपयोग हो सकता है, लेकिन इच्छित आउटपुट अलग होता है। [3]
थोक खरीद में bold या medium जैसे शब्दों के साथ यह स्पष्ट करना उपयोगी है कि विक्रेता किस आकार या उत्पाद विवरण की बात कर रहा है। इस लेख में कोई सार्वभौमिक millimetre सीमा तय नहीं की गई है। आकार के नाम से हर दूसरी विशेषता का निष्कर्ष भी नहीं निकलता।
ऑप्टिकल सॉर्टिंग में कैमरा और चुनी हुई सेटिंग काम करते हैं
ऑप्टिकल सॉर्टर प्रकाश और सेंसर से मिले संकेतों के आधार पर चयन करता है। उदाहरण के लिए, SORTEX A ColorVision के निर्माता विवरण में रंग के साथ आकार और आकृति पहचानने की सुविधाएं दी गई हैं। कुछ मॉडल अतिरिक्त सेंसर भी इस्तेमाल करते हैं। हर कलर सॉर्टर में वही सुविधाएं हैं, ऐसा मानना ठीक नहीं होगा। [4]
इसीलिए मशीन पर बातचीत करते समय पूछा जा सकता है: यह मॉडल किस प्रकार के दोष पहचानने के लिए बना है, और चुनी हुई सेटिंग किस उत्पाद के लिए है? केवल कैमरा लगा होना किसी खास हटाने की दर, उत्पादन क्षमता या पूरी खेप के परिणाम को सिद्ध नहीं करता। इस लेख में ऐसे प्रदर्शन आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
मशीन के नाम के साथ उसका काम भी समझें
इन चरणों को याद रखने का सरल तरीका है: छलनी में आकार से अलगाव; डी स्टोनर में भारी कणों को हटाना; ग्रेडिंग में उत्पाद के आकारों का वर्गीकरण; और ऑप्टिकल सॉर्टिंग में मशीन की क्षमता के अनुसार रंग, आकृति या अन्य सेंसर संकेतों से चयन। ये समझने के चार नजरिए हैं, किसी प्लांट का तय flow chart नहीं।
Neevika की सार्वजनिक वेबसाइट सफाई, ग्रेडिंग, मिलिंग और ऑप्टिकल सॉर्टिंग को अपनी प्रोसेसिंग जानकारी में शामिल करती है। चना दाल या बेसन की व्यावसायिक पूछताछ में उत्पाद, मात्रा और डिलीवरी स्थान बताएं। संपर्क: +91 87005 69472 या neevika.in। [5]
स्रोत
[3] Bühler Sifting and Grading